परिकल्पना के पहले ब्लॉग विश्लेषण में ज्यादा ब्लोग्स की चर्चा नहीं की जा सकी थी, क्योंकि तब सक्रिय ब्लोग्स की संख्या बहुत कम थी और कुछ गिने-चुने ब्लोगर ही लगातार अपनी सक्रियता को बनाए हुए थे ....ऐसे में आईये पहले ब्लॉग विश्लेषण की तीसरी और आखिरी कड़ी पर नज़र डालते हैं -

बडे ढोल म पोल बड़ी , यही मुकद्दस बात !
जिसका दिल जितना बड़ा , वही "चकल्लस " गात !!

नीरव की यह "वाटिका " देती है सन्देश !
अनवरत साहित्य बढे , प्रगति करे यह देश !!

"घुघूती बासूती" को, " कथाकार" की राय !
उत्तरोत्तर सोपान पे , नया साल ले जा य !!


" आलोक पुराणिक " बोले, " नीरज " जी को छोड़ !
चिट्ठा- चिट्ठा घूम के , लगा रहे हो होड़ !!



कुछ विनोद भी सुस्त है , निकल गया "अरमान"
"
मंगलम " कहते रहे, सबको दो सम्मान !!


" अनूप शुक्ल " श्रधेय हैं, करते नहीं" भदेस" !

सबको देते स्नेह से , शांति- सुख- सन्देश !!


अपना चिंतन बांचिये , देकर सबको प्यार !
सदीच्छा से भरा रहे, यह सुन्दर संसार !!


कुछ चिट्ठे नाराज हैं, अंकित नही है नाम !
खास-खास को छोड़ के , जोड़े हो क्यूं आम ? ?


भाई मेरे यह सोचो, कुछ तो हुआ कमाल !
पढा है जिसको मैंने , पूछा उसका हाल !!


बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक

() रवीन्द्र प्रभात

14 टिप्पणियाँ:

  1. अथक परिक्रमा जारी रखिये ना।

    बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
    समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक

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  2. बहुत सुंदर।
    ठीक भी है, जिसे पढ़ा है उसीके बारे में राय व्यक्त की जा सकती है। इसमें कोई बुराई नहीं है।
    अच्छा लगा।

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  3. समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक

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  4. बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
    समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक


    -समझ गये :)

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  5. बहुत ही अच्छा लिखा है मैं तो नया हूँ मेरा तो सबसे परिचय नहीं है.
    हमारे अंदर भी ये गुण आ जाये तो मजा आये.
    http://rajkibatein.blogspot.com/
    पढ़ के देखिये

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